झांसी को हीट रेजिलिएंट बनाने की पहल, डीएम ने किया मॉडल जिला कार्य योजना का विमोचन

झांसी। बुंदेलखंड क्षेत्र में बढ़ते हीटवेव एवं जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए जनपद झांसी के लिए मॉडल जिला कार्य योजना जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य (DAPCCHH) तैयार की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने कार्य योजना की पुस्तक का विमोचन किया। यह मॉडल कार्य योजना यूनिसेफ एवं ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड (MAMTA HIMC) के तकनीकी सहयोग से जिला सर्विलांस यूनिट (DSU), एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP), स्वास्थ्य विभाग झांसी द्वारा तैयार की गई है। जिलाधिकारी ने कार्य योजना की एक प्रति जिला आपदा प्रबंधन इकाई को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विभागों को कार्य योजना में दिए गए सुझावों के अनुरूप कार्यवाही करते हुए एक माह के अंदर गर्मी के प्रभाव से बचाव एवं अन्य संबंधित उपायों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। यह पहल जनपद झांसी को जलवायु परिवर्तन एवं बढ़ती गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों से निपटने के लिए अधिक हीट रेजिलिएंट एवं स्वास्थ्य-सुरक्षित जनपद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।*हीटवेव के प्रति झांसी की संवेदनशीलता* जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार झांसी बुंदेलखंड के प्रमुख हीट-स्ट्रेस एवं सूखा प्रभावित जनपदों में शामिल है। मई-जून में अधिकतम तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। जनपद की लगभग 20.7 लाख आबादी में बड़ी संख्या कृषि एवं असंगठित क्षेत्रों में बाहर कार्य करने वाले लोगों की है, जो सीधे गर्मी के संपर्क में रहते हैं। सीमित वन आवरण के कारण शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड प्रभाव की चुनौती भी बढ़ती है।*सभी 8 विकासखंडों का किया गया हीट वल्नरेबिलिटी असेसमेंट* कार्य योजना के अंतर्गत जनपद के सभी आठ विकासखंडों—बबीना, बंगरा, बड़ागांव, चिरगांव, बामौर, गुरसराय, मऊरानीपुर एवं मोठ—का वैज्ञानिक पद्धति से हीट वल्नरेबिलिटी इंडेक्स (HVI) तैयार किया गया, इसमें तापमान, आर्द्रता एवं हीट इंडेक्स, जनसंख्या घनत्व, पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे, कुपोषण, गर्भवती महिलाएं, डायरिया के मामले तथा स्वास्थ्य सुविधाओं, एंबुलेंस एवं हेल्थ वर्कफोर्स सहित 20 से अधिक संकेतकों को शामिल किया गया। HVI के अनुसार मऊरानीपुर (0.8663) एवं बंगरा (0.8225) सर्वाधिक संवेदनशील पाए गए, जबकि चिरगांव, बामौर एवं गुरसराय मध्यम संवेदनशील श्रेणी में रहे। मोठ (0.3588) एवं बबीना (0.3606) तुलनात्मक रूप से कम संवेदनशील पाए गए, जहां अनुकूलन क्षमता बेहतर पाई गई।*8 सूत्रीय कार्य योजना पर बनी सहमति* बैठक में मॉडल कार्य योजना को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता एवं विस्तार देने, संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यान्वयन अनुसंधान, हीट रिलेटेड बीमारियों एवं हीटस्ट्रोक के बेहतर क्लीनिकल प्रबंधन, बीमारी एवं मृत्यु दर में कमी, HRI सर्विलांस एवं रिपोर्टिंग को मजबूत करने तथा गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बाहर कार्य करने वाले श्रमिकों जैसे संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही हीटवेव सीजन में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई तथा जमीनी स्तर पर किए जा रहे नवाचारों के दस्तावेजीकरण पर भी सहमति बनी। सीएमओ ने दिए प्रभावी हीट स्ट्रोक प्रबंधन के निर्देशमुख्य चिकित्सा अधिकारी, झांसी ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को निर्देशित किया कि मॉडल जिला कार्य योजना में दिए गए सुझावों के अनुरूप आगामी ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से बचाव, हीट रिलेटेड बीमारियों की रोकथाम एवं हीटस्ट्रोक मैनेजमेंट के लिए प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

रिपोर्ट – मुकेश वर्मा/राहुल कोष्टा

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